बचपन से ही सवाल पूछने वाला मन
मुकुंद लाल घोष का जन्म 1893 में गोरखपुर के एक बंगाली परिवार में हुआ। उनके माता-पिता लाहिड़ी महाशय के शिष्य थे, इसलिए घर में साधना और भक्ति का माहौल था। किताब में वे बताते हैं कि बचपन से ही उनके मन में ईश्वर को सीधे जानने की तीव्र इच्छा थी। माँ के जल्दी निधन ने इस खोज को और गहरा कर दिया।
किशोर उम्र में वे कुछ दोस्तों के साथ चुपचाप हिमालय जाने निकल पड़े, लेकिन बड़े भाई अनंत ने उन्हें रास्ते में पकड़कर घर लौटा लिया। यह प्रसंग हल्का-फुल्का है, पर उनकी बेचैनी की सच्चाई भी दिखाता है।
आज क्या करें: अगर आपके मन में भी जीवन के बड़े सवाल उठते हैं, तो उन्हें दबाने के बजाय धैर्य से किसी सही दिशा और अनुभवी मार्गदर्शक की तलाश करें।