भावनाएँ फ़ैसले चलाती हैं, दिमाग़ बाद में बहाना ढूँढता है
Greene का पहला law तर्कहीनता (irrationality) पर है। हम ख़ुद को समझदार मानते हैं, लेकिन असल में डर, उत्साह, ग़ुस्सा और चिढ़ जैसे भाव हमारे बहुत से फ़ैसले पहले ही तय कर देते हैं, और फिर दिमाग़ उन्हें सही ठहराने के तर्क गढ़ता है।
इस अध्याय में वे प्राचीन Athens के नेता Pericles का उदाहरण देते हैं, जिन्हें वे भावनाओं पर क़ाबू रखकर सोचने वाले नेता के आदर्श रूप में पेश करते हैं। Pericles जल्दबाज़ी से बचते थे और फ़ैसले से पहले ठहरकर सोचते थे। Greene का सुझाव है कि पूरी तरह भावनाहीन होना न संभव है, न ज़रूरी, लेकिन अपने भावों को पहचानना और उनके और अपने फ़ैसले के बीच थोड़ी दूरी बनाना सीखा जा सकता है।
आज क्या करें: ग़ुस्से या ज़्यादा ख़ुशी में कोई बड़ा फ़ैसला, बड़ा message या बड़ी ख़रीदारी करने से पहले कम से कम एक रात रुकने का नियम बना लें।