Click, whirr: दिमाग़ के autopilot फ़ैसले
Cialdini एक मादा turkey का उदाहरण देते हैं, जो अपने बच्चों की देखभाल सिर्फ़ उनकी 'cheep-cheep' आवाज़ सुनकर करती है। प्रयोग में जब उसके दुश्मन जानवर के भरे हुए पुतले के अंदर यही आवाज़ बजाई गई, तो वह उसे भी अपने पंखों में समेटने लगी। एक ट्रिगर मिला, और पूरा व्यवहार अपने आप चल पड़ा।
इंसान भी ऐसे shortcuts से चलता है। किताब में एक jewelry दुकान का क़िस्सा है जहाँ कुछ गहने नहीं बिक रहे थे। ग़लती से उनकी क़ीमत दोगुनी कर दी गई और वे जल्दी बिक गए, क्योंकि ख़रीदारों ने मान लिया कि महँगा है तो अच्छा होगा। Cialdini 'contrast' की भी बात करते हैं: महँगा suit बिकने के बाद sweater सस्ता लगता है, इसलिए दुकानदार पहले बड़ी चीज़ दिखाते हैं।
आज क्या करें: ख़रीदारी करते समय क़ीमत को गुणवत्ता का सबूत न मानें, और पहले दिखाई गई महँगी चीज़ से तुलना करके बाक़ी चीज़ों को सस्ता न समझें।