📖 Book Summary in Hindi

Think and Grow Rich — सोचिए और अमीर बनिए

लेखक: Napoleon Hill

Napoleon Hill के अनुसार हर बड़ी कामयाबी एक साफ़ और जलती हुई इच्छा से शुरू होती है, जिसे पक्की योजना, लगातार कोशिश और सही लोगों का साथ हक़ीक़त में बदलता है।

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क्या कोई इंसान सिर्फ़ सोचकर अमीर बन सकता है? किताब का नाम पढ़कर कई लोग यही मान बैठते हैं, लेकिन Napoleon Hill का मतलब इससे अलग है। उनके लिए 'सोचना' दिन में सपने देखना नहीं, बल्कि एक साफ़ लक्ष्य तय करना, उस पर पूरा भरोसा रखना और फिर रोज़ उसके लिए काम करना है। 1937 में छपी यह किताब अमेरिका की महामंदी (Great Depression) के दौर में आई थी, जब लोग बेरोज़गार और निराश थे, और इसमें उम्मीद की बात इसी वजह से इतनी ज़ोर से की गई है।

Hill बताते हैं कि उद्योगपति Andrew Carnegie की प्रेरणा से उन्होंने सफल लोगों के तरीक़ों को समझने में बरसों लगाए और उनसे निकले सिद्धांतों को तेरह क़दमों में पिरोया, जैसे desire, faith, specialized knowledge, planning और persistence। नीचे इनमें से सबसे काम के विचार आसान भाषा में हैं। यह सब आम समझ के लिए है, इसे निवेश या कारोबार की सलाह न मानें।

Think and Grow Rich के 6 मुख्य सबक

1

सब कुछ एक जलती हुई इच्छा से शुरू होता है

किताब की सबसे मशहूर कहानी Edwin C. Barnes की है। Barnes के पास न पैसा था, न पहचान, फिर भी उनके मन में एक ही बात थी कि उन्हें Thomas Edison के साथ काम करना है, कर्मचारी नहीं, साझेदार के तौर पर। वे Edison के दफ़्तर पहुँचे और मामूली नौकरी से शुरुआत की। जब Edison की एक dictating machine को बेचने में बाक़ी लोग हिचक रहे थे, तब Barnes ने यह ज़िम्मेदारी ले ली और आख़िर में सचमुच Edison के कारोबारी साझेदार बने।

Hill इसे 'burning desire' कहते हैं, यानी ऐसी चाह जो बस 'हो जाए तो अच्छा' वाली ख़्वाहिश न हो। वे इसके लिए छह क़दम भी सुझाते हैं: ठीक-ठीक रक़म या लक्ष्य तय करो, यह तय करो कि बदले में क्या दोगे, एक तारीख़ तय करो, योजना बनाओ, यह सब लिखो, और उस लिखे हुए को रोज़ सुबह-शाम ज़ोर से पढ़ो।

आज क्या करें: 'अच्छी नौकरी चाहिए' जैसे धुंधले लक्ष्य के बजाय लिखिए कि किस पद पर, किस साल तक और उसके लिए कौन-सी skill सीखेंगे, फिर उस काग़ज़ को रोज़ देखिए।

2

विश्वास और autosuggestion: मन को बार-बार वही बताना

Hill का मानना है कि जो बात हम ख़ुद से बार-बार कहते हैं, वह अवचेतन मन (subconscious mind) में बैठकर हमारे बर्ताव को चलाने लगती है। इसी को वे autosuggestion कहते हैं। उनके अनुसार विश्वास जन्मजात नहीं, दोहराव और भावना से पैदा किया जा सकता है।

यहाँ ज़रूरी बात यह है कि Hill सिर्फ़ शब्द दोहराने की बात नहीं करते। वे कहते हैं कि लक्ष्य पढ़ते समय उसे महसूस करो, ख़ुद को उसे हासिल करते हुए देखो। साथ ही यह भी चेताते हैं कि यही ताक़त उल्टी दिशा में भी काम करती है। जो इंसान रोज़ ख़ुद से कहता है कि 'मुझसे नहीं होगा', वह भी अपने मन को वही सिखा रहा है।

आज क्या करें: परीक्षा की तैयारी करने वाला छात्र 'मैं कमज़ोर हूँ' दोहराने के बजाय रोज़ यह लिखे कि आज उसने कौन-सा topic पूरा किया, ताकि भरोसा अनुभव पर टिके।

3

ज्ञान तभी ताक़त है जब उसे काम में लगाया जाए

Hill कहते हैं कि सामान्य जानकारी (general knowledge) से अपने आप पैसा नहीं बनता। काम आता है specialized knowledge, यानी किसी ख़ास क्षेत्र की गहरी समझ, और उसे एक योजना के ज़रिए इस्तेमाल करना। इसके लिए वे Henry Ford से जुड़े एक मुक़दमे का क़िस्सा सुनाते हैं, जिसमें विरोधी वकीलों ने Ford से इतिहास और सामान्य ज्ञान के सवाल पूछकर उन्हें अनपढ़ साबित करने की कोशिश की।

Hill के अनुसार Ford का जवाब था कि उनकी मेज़ के बटन दबाते ही वे लोग आ जाते हैं जो ये जवाब जानते हैं, तो हर बात रटने की क्या ज़रूरत। सफल इंसान सब कुछ ख़ुद नहीं जानता, पर उसे पता होता है कि जानकारी किससे मिलेगी।

आज क्या करें: छोटे कारोबारी को हर काम ख़ुद सीखने की ज़रूरत नहीं; हिसाब-किताब, tax या online marketing के लिए भरोसेमंद जानकार से सलाह लेना भी एक समझदारी भरी skill है।

4

योजना फ़ेल हो तो नई योजना, लक्ष्य वही

Hill कहते हैं कि कल्पना तभी काम की है जब वह organized planning में बदले। और अगर पहली योजना नाकाम हो जाए, तो उसे अपनी हार न मानें, बस नई योजना बनाएँ। वे यह भी देखते हैं कि कामयाब लोग फ़ैसला जल्दी लेते हैं और उसे बदलने में धीमे होते हैं, जबकि दूसरों की राय पर ज़्यादा टिके लोग अक्सर अपना सपना छोटा कर लेते हैं।

Persistence पर उनकी सबसे याद रहने वाली कहानी R. U. Darby की है, जिनका परिवार सोने की खान में लगा था। सोने की परत अचानक ग़ायब हो गई, तो उन्होंने हार मानकर मशीनें एक कबाड़ वाले को बेच दीं। उस आदमी ने इंजीनियर से जाँच करवाई और सोना वहीं से कुछ ही फ़ुट आगे निकला। Darby ने यह सबक याद रखा और बाद में बीमा बेचते समय 'ना' सुनकर रुकना छोड़ दिया।

आज क्या करें: Interview में बार-बार असफल होने वाला युवा हर 'ना' के बाद एक कमी पहचानकर सुधारे और नई रणनीति बनाए, लेकिन कोशिश बंद न करे।

5

Master Mind: सही लोगों का समूह

Hill के अनुसार जब दो या ज़्यादा लोग एक साझा लक्ष्य के लिए तालमेल और भरोसे के साथ काम करते हैं, तो उनकी मिली-जुली सोच किसी अकेले इंसान से कहीं ज़्यादा ताक़तवर होती है। इसे वे 'Master Mind' कहते हैं। वे Andrew Carnegie का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने अपने आसपास ऐसे लोगों का समूह बनाया था जिनकी जानकारी और हुनर ने उनके steel कारोबार को आगे बढ़ाया।

यहाँ ज़ोर 'harmony' यानी आपसी तालमेल पर है। जिस समूह में लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे रहें, वहाँ ताक़त नहीं, थकान पैदा होती है।

आज क्या करें: Competitive exam की तैयारी कर रहे दो-तीन गंभीर दोस्त एक छोटा study group बनाएँ, जो हर हफ़्ते एक-दूसरे की प्रगति पर ईमानदारी से बात करे।

6

डर के छह भूत और मन की सफ़ाई

किताब के आख़िर में Hill उन छह बुनियादी डरों की बात करते हैं जिन्हें वे 'ghosts of fear' कहते हैं: ग़रीबी का डर, आलोचना का डर, बीमारी का डर, प्यार खोने का डर, बुढ़ापे का डर और मौत का डर। उनके मुताबिक़ ये डर टालमटोल, बहानेबाज़ी और अनिर्णय के रूप में सामने आते हैं और इंसान को आगे बढ़ने से रोकते हैं।

Hill कहते हैं कि डर मन की एक अवस्था है, और मन की अवस्था बदली जा सकती है। वे दूसरों की नकारात्मक बातों के असर से बचने पर भी ज़ोर देते हैं।

आज क्या करें: जिस काम को आप महीनों से टाल रहे हैं, उसके पीछे छिपा डर पहचानिए, जैसे 'लोग क्या कहेंगे', और उसे काग़ज़ पर लिखकर उसका सबसे छोटा पहला क़दम आज ही उठाइए।

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यह किताब किसके लिए है

  • ✓वे युवा जो करियर या कारोबार का कोई बड़ा लक्ष्य तय करना चाहते हैं लेकिन शुरुआत नहीं कर पा रहे
  • ✓छोटे कारोबारी और salespeople जिन्हें बार-बार 'ना' सुनकर भी टिके रहना होता है
  • ✓Self-help की classic किताबों से शुरुआत करने वाले पाठक
  • ✓वे लोग जो डर, टालमटोल और अनिर्णय से बाहर निकलना चाहते हैं

लेखक के बारे में: Napoleon Hill

Napoleon Hill (1883–1970) अमेरिकी लेखक थे, जिनका जन्म Virginia राज्य में हुआ था। उन्होंने पत्रकार के तौर पर काम शुरू किया और बाद में सफलता के सिद्धांतों पर लिखने और भाषण देने के लिए जाने गए। Think and Grow Rich से पहले उनकी The Law of Success नाम की किताब आ चुकी थी।

यह किताब दुनिया की सबसे ज़्यादा बिकने वाली self-help किताबों में गिनी जाती है। कुछ शोधकर्ताओं ने Hill के कुछ निजी दावों, जैसे मशहूर लोगों से मुलाक़ातों, पर सवाल भी उठाए हैं, इसलिए इसे प्रेरक मार्गदर्शिका की तरह पढ़ना बेहतर है, इतिहास की तरह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Think and Grow Rich का मुख्य संदेश क्या है?+

इसका मुख्य संदेश यह है कि साफ़ लक्ष्य, गहरी इच्छा, उस पर भरोसा, ठोस योजना और लगातार कोशिश मिलकर इंसान को कामयाबी की ओर ले जाते हैं। Hill इसके लिए तेरह सिद्धांत बताते हैं, जिनमें desire, faith, persistence और Master Mind सबसे अहम हैं।

क्या यह किताब सिर्फ़ पैसा कमाने के बारे में है?+

नाम में 'rich' है, लेकिन ज़्यादातर सिद्धांत किसी भी लक्ष्य पर लागू होते हैं, चाहे वह पढ़ाई हो, नौकरी हो या कोई कला। Hill ख़ुद कहते हैं कि ये नियम पैसे के अलावा दूसरी चाहतों पर भी काम करते हैं।

क्या लगभग नब्बे साल पुरानी यह किताब आज के भारतीय पाठक के काम की है?+

उदाहरण पुराने अमेरिका के हैं, लेकिन लक्ष्य लिखना, हार के बाद नई योजना बनाना और डर पर काबू जैसे विचार आज भी काम के हैं। रहस्यमय लगने वाले हिस्सों को अपनी समझ से परखकर पढ़ें।

Think and Grow Rich का Hindi audiobook कितना लंबा है?+

HindiAudiobook.com पर इसका Hindi audiobook लगभग 9 घंटे 22 मिनट का है। आप इसे रोज़ के सफ़र या सुबह की सैर के दौरान थोड़ा-थोड़ा करके सुन सकते हैं।

ये सबक Napoleon Hill की सोच का बस एक नक़्शा हैं; असली प्रेरणा उनकी कहानियों को पूरे विस्तार से सुनकर मिलती है। Think and Grow Rich का पूरा Hindi audiobook अभी HindiAudiobook.com पर सुनिए।

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यह summary HindiAudiobook.com ने अपने शब्दों में लिखी है, ताकि आप किताब के मुख्य विचार समझ सकें। पूरी किताब का अनुभव लेने के लिए audiobook सुनें या मूल किताब पढ़ें।