शिव जवाब में दर्शन नहीं, विधि देते हैं
Osho इस बात पर बार-बार ध्यान दिलाते हैं कि देवी के सवाल दार्शनिक हैं, लेकिन शिव कोई तर्क या परिभाषा नहीं देते। वे सीधे बताते हैं कि यह करो, ऐसे बैठो, इस क्षण को ऐसे देखो। Osho के अनुसार इसका कारण यह है कि सत्य के बारे में सुनी हुई बातें उधार का ज्ञान बनकर रह जाती हैं, जबकि अनुभव सिर्फ़ प्रयोग से आता है।
इसीलिए वे इस ग्रंथ को 'विज्ञान' कहते हैं। विज्ञान में भी विश्वास से नहीं, प्रयोग से बात तय होती है। ध्यान की ये विधियाँ भी किसी मान्यता की माँग नहीं करतीं, बस ईमानदारी से आज़माने की माँग करती हैं।
आज क्या करें: आध्यात्मिक किताबें बहुत पढ़ने वाला साधक यह तय करे कि रोज़ पढ़ने के समय का एक हिस्सा अब सिर्फ़ बैठकर अभ्यास में लगाएगा।