📖 Book Summary in Hindi

How to Win Friends and Influence People — दोस्त कैसे बनाएँ और लोगों को कैसे प्रभावित करें

लेखक: Dale Carnegie

लोगों का दिल जीतने का रास्ता चालाकी से नहीं, बल्कि सामने वाले में सच्ची दिलचस्पी, उसकी इज़्ज़त और उसकी नज़र से चीज़ें देखने से होकर जाता है।

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ज़रा सोचिए, office में दो सहकर्मी हैं। दोनों का काम लगभग एक जैसा है, लेकिन एक के साथ सब ख़ुशी से काम करना चाहते हैं और दूसरे से लोग कतराते हैं। फ़र्क़ अक्सर हुनर का नहीं, बर्ताव का होता है। Dale Carnegie की यह किताब इसी फ़र्क़ को समझाती है।

1936 में छपी यह किताब शायद दुनिया की सबसे मशहूर self-help किताबों में गिनी जाती है। Carnegie ने इसे अपने उन courses के अनुभव से तैयार किया जिनमें वे बड़ों को बोलना और लोगों से बेहतर रिश्ते बनाना सिखाते थे। किताब में सीधे-सादे नियम हैं, और हर नियम के साथ असली लोगों की कहानियाँ, ताकि बात दिमाग़ में बैठ जाए। नीचे उन नियमों के पीछे की सोच को छह हिस्सों में समझाया गया है।

How to Win Friends and Influence People के 6 मुख्य सबक

1

आलोचना से कोई नहीं बदलता

Carnegie की पहली बड़ी बात यह है कि आलोचना, निंदा और शिकायत से लोग सुधरते नहीं, बल्कि अपना बचाव करने लगते हैं। वे बताते हैं कि जेल में बंद बड़े अपराधी भी अक्सर ख़ुद को ग़लत नहीं मानते थे; उनके पास अपने काम को सही ठहराने के अपने तर्क होते थे। जब अपराधी ख़ुद को दोषी नहीं मानता, तो रोज़ के आम लोग ताने सुनकर कैसे बदलेंगे?

वे Abraham Lincoln का उदाहरण देते हैं। गृहयुद्ध के दौरान एक जनरल की ग़लती से नाराज़ होकर Lincoln ने उसे एक कड़ा पत्र लिखा, लेकिन वह पत्र कभी भेजा नहीं गया। Carnegie के अनुसार Lincoln ने समय के साथ सीख लिया था कि तीखी आलोचना से काम नहीं बनता, सिर्फ़ कड़वाहट बढ़ती है।

आज क्या करें: गुस्से में लिखा WhatsApp message या email तुरंत न भेजें; उसे draft में छोड़ दें और ठंडे दिमाग़ से अगले दिन पढ़ें, ज़्यादातर बार आप उसे बदल देंगे।

2

सच्ची तारीफ़ और सामने वाले की चाहत

Carnegie कहते हैं कि हर इंसान के भीतर ख़ुद को अहम महसूस करने की गहरी चाह होती है। जो व्यक्ति ईमानदारी से दूसरों के अच्छे काम को पहचानता है, लोग उसके क़रीब आते हैं। लेकिन वे चापलूसी और सच्ची तारीफ़ में साफ़ फ़र्क़ करते हैं: चापलूसी झूठी और स्वार्थी होती है, जबकि सच्ची सराहना दिल से निकलती है और ख़ास बात पर टिकी होती है।

इसके साथ वे एक और सूत्र देते हैं: अगर किसी से कुछ करवाना है, तो अपनी ज़रूरत की नहीं, उसकी ज़रूरत की बात करें। उनका मज़ेदार उदाहरण मछली पकड़ने का है। आपको भले strawberries पसंद हों, लेकिन काँटे पर वही लगाते हैं जो मछली को पसंद है।

आज क्या करें: दुकानदार ग्राहक को यह न बताए कि उसे कितना stock निकालना है, बल्कि यह बताए कि वह चीज़ ग्राहक की कौन-सी परेशानी हल करेगी।

3

लोग आपको पसंद करें, इसके छोटे पर पक्के तरीके

किताब का एक हिस्सा पूरी तरह इस पर है कि लोग हमें पसंद क्यों करते हैं। Carnegie के नियम बहुत सरल लगते हैं: दूसरों में सच्ची दिलचस्पी लें, मुस्कराएँ, उनका नाम याद रखें, अच्छे श्रोता बनें, उनकी रुचि की बात करें और उन्हें अहमियत का एहसास कराएँ, लेकिन दिल से।

नाम के महत्व पर वे Andrew Carnegie का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने बचपन में पड़ोस के बच्चों से वादा किया कि जो खरगोशों के लिए चारा लाएगा, उसके नाम पर एक खरगोश का नाम रखा जाएगा। यह तरीका काम कर गया। बड़े होकर भी वे लोगों के नाम की इस ताक़त का इस्तेमाल business में करते रहे। Dale Carnegie यह भी लिखते हैं कि एक कुत्ता बिना कुछ कहे सिर्फ़ सच्ची ख़ुशी दिखाकर दोस्त बना लेता है।

आज क्या करें: नई नौकरी या नए college में लोगों के नाम एक छोटी diary या phone note में लिख लें और अगली मुलाक़ात में नाम से बुलाएँ; यह छोटा क़दम रिश्ते को बहुत जल्दी गर्म कर देता है।

4

बहस जीतकर भी आदमी हार जाता है

Carnegie मानते हैं कि बहस जीतने का सबसे अच्छा तरीका है उससे बचना। अगर आप बहस हार गए तो हार गए, और अगर जीत गए तब भी सामने वाले का अहं आहत होता है और वह आपकी बात मन से नहीं मानता। इसलिए वे सलाह देते हैं कि किसी से सीधे 'आप ग़लत हैं' कहने के बजाय उसकी राय का सम्मान करें।

जब ग़लती अपनी हो, तो उसे जल्दी और खुलकर मान लें। Carnegie बताते हैं कि जब वे ख़ुद अपनी ग़लती पहले ही मान लेते थे, तो सामने वाले का गुस्सा अक्सर ठंडा पड़ जाता था। बातचीत दोस्ताना ढंग से शुरू करें, ऐसे सवाल पूछें जिनका जवाब 'हाँ' में हो, और सामने वाले को ज़्यादा बोलने दें।

आज क्या करें: परिवार में किसी फ़ैसले पर असहमति हो तो पहले उन बातों से शुरू करें जिन पर सब सहमत हैं; मतभेद वाले मुद्दे पर बाद में आएँ।

5

विचार को सामने वाले का बना दीजिए

लोग वह काम ज़्यादा मन से करते हैं जिसे वे अपना विचार मानते हैं। इसलिए Carnegie कहते हैं कि सुझाव इस तरह दें कि सामने वाला ख़ुद उस नतीजे तक पहुँचे। हर बात को उसकी नज़र से देखने की ईमानदार कोशिश करें, उसकी भावनाओं के प्रति हमदर्दी रखें और उसके अच्छे इरादों से अपील करें।

वे Charles Schwab का क़िस्सा सुनाते हैं, जिनकी एक steel mill उत्पादन में पीछे थी। Schwab ने डाँटने के बजाय दिन की shift से पूछा कि उन्होंने कितनी heat पूरी की, और फ़र्श पर chalk से वह संख्या लिख दी। रात की shift ने उसे देखा और उसे पीछे छोड़ने की ठान ली। एक छोटी-सी चुनौती ने वह कर दिखाया जो आदेश नहीं कर पाए।

आज क्या करें: Team leader हैं तो आदेश देने के बजाय पूछें, 'इस target तक कैसे पहुँचें, आपकी क्या राय है?' जवाब देने वाला उस योजना को निभाने में ज़्यादा ज़िम्मेदारी महसूस करेगा।

6

ग़लती सुधारें, पर इज़्ज़त बचाकर

किताब का आख़िरी हिस्सा नेतृत्व पर है। Carnegie की सलाह है कि किसी की कमी बताने से पहले उसकी सच्ची तारीफ़ से शुरुआत करें, ग़लती की ओर सीधे नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से इशारा करें, और पहले अपनी कोई ग़लती स्वीकार करें। आदेश की जगह सवाल पूछें और सामने वाले को सबके सामने शर्मिंदा न होने दें।

वे यह भी कहते हैं कि हल्का-सा सुधार भी दिखे तो उसकी तारीफ़ करें, और व्यक्ति को एक अच्छी छवि दें जिस पर वह खरा उतरना चाहे। जब आप किसी से कहते हैं कि आपको उस पर भरोसा है, तो वह अक्सर उस भरोसे को टूटने नहीं देना चाहता।

आज क्या करें: माता-पिता बच्चे के ख़राब result पर पहले उस विषय की तारीफ़ करें जिसमें उसने अच्छा किया, फिर कमज़ोर विषय पर साथ बैठकर योजना बनाएँ; डाँट से ज़्यादा असर भरोसे का होता है।

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यह किताब किसके लिए है

  • ✓Sales, marketing या customer service में काम करने वाले लोग
  • ✓नए manager और team leader जो बिना डर पैदा किए काम करवाना सीखना चाहते हैं
  • ✓शर्मीले छात्र और युवा जो नए लोगों से बात करने में झिझकते हैं
  • ✓छोटे व्यापारी जिन्हें ग्राहकों और कर्मचारियों से लंबे रिश्ते बनाने हैं
  • ✓माता-पिता जो बच्चों से टकराव कम करके बेहतर संवाद चाहते हैं

लेखक के बारे में: Dale Carnegie

Dale Carnegie का जन्म 1888 में अमेरिका के Missouri राज्य में एक किसान परिवार में हुआ। शुरुआत में उन्होंने salesman के तौर पर काम किया, फिर 1912 के आसपास YMCA में बड़ों को public speaking सिखाने लगे। यही classes आगे चलकर Dale Carnegie course के रूप में दुनिया भर में फैलीं।

How to Win Friends and Influence People के अलावा उनकी दूसरी मशहूर किताब How to Stop Worrying and Start Living है। 1955 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी किताबें आज भी कई भाषाओं में पढ़ी और सुनी जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

How to Win Friends and Influence People का मुख्य संदेश क्या है?+

किताब का मूल संदेश है कि दूसरों से अच्छे रिश्ते बनाने के लिए उनकी आलोचना कम करें, सच्ची तारीफ़ करें, उनमें दिलचस्पी लें और हर बात उनकी नज़र से देखने की कोशिश करें।

क्या यह किताब लोगों को manipulate करना सिखाती है?+

नहीं। Carnegie बार-बार कहते हैं कि ये तरीके तभी काम करते हैं जब वे सच्चे हों। झूठी तारीफ़ या दिखावटी दिलचस्पी को लोग जल्दी पहचान लेते हैं, इसलिए किताब ईमानदारी पर ज़ोर देती है।

क्या 1936 की यह किताब आज के भारत में भी काम की है?+

हाँ। इसके उदाहरण पुराने अमेरिका के हैं, लेकिन इंसानी स्वभाव नहीं बदला। Office, परिवार, दुकान या interview, हर जगह ये नियम उतने ही उपयोगी हैं।

इसका Hindi audiobook कितना लंबा है?+

HindiAudiobook.com पर इसका Hindi audiobook लगभग 8 घंटे 45 मिनट का है, जिसे रोज़ के सफ़र में कुछ दिनों में आराम से पूरा किया जा सकता है।

ये नियम पढ़ने में आसान हैं, पर असर तब दिखता है जब इन्हें बार-बार सुनकर आदत बनाया जाए। How to Win Friends and Influence People का पूरा Hindi audiobook HindiAudiobook.com पर सुनें।

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