आलोचना से कोई नहीं बदलता
Carnegie की पहली बड़ी बात यह है कि आलोचना, निंदा और शिकायत से लोग सुधरते नहीं, बल्कि अपना बचाव करने लगते हैं। वे बताते हैं कि जेल में बंद बड़े अपराधी भी अक्सर ख़ुद को ग़लत नहीं मानते थे; उनके पास अपने काम को सही ठहराने के अपने तर्क होते थे। जब अपराधी ख़ुद को दोषी नहीं मानता, तो रोज़ के आम लोग ताने सुनकर कैसे बदलेंगे?
वे Abraham Lincoln का उदाहरण देते हैं। गृहयुद्ध के दौरान एक जनरल की ग़लती से नाराज़ होकर Lincoln ने उसे एक कड़ा पत्र लिखा, लेकिन वह पत्र कभी भेजा नहीं गया। Carnegie के अनुसार Lincoln ने समय के साथ सीख लिया था कि तीखी आलोचना से काम नहीं बनता, सिर्फ़ कड़वाहट बढ़ती है।
आज क्या करें: गुस्से में लिखा WhatsApp message या email तुरंत न भेजें; उसे draft में छोड़ दें और ठंडे दिमाग़ से अगले दिन पढ़ें, ज़्यादातर बार आप उसे बदल देंगे।