दुनियां में भारतीय इतने बढिया मैनेजर क्यों होते है?

Why are Indian so damn good in the World

Why are Indian so damn good in the World?

सत्य नडेला (Microsoft), सुंदर पिचई (Google), इंद्रा नूई (Ex – Pepsico), शांतनु नारायण (Adobe), नितिन नहरिया (हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल) आदि दुनियां के वे जाने-माने नाम है जिन्हें आज हर कोई जानता है, ऐसे ही और अनगिनत नाम है जिन्हें हम और आप कम ही जानते है, लेकिन उन्हें उनके क्षेत्र में दुनियां बखूबी पहचानती है। वे उन विश्व प्रसिद्ध कंपनियों के सफल लीडर हैं, जो दुनिया में रहने वाले हर इंसान के जीवन को किसी न किसी तरह प्रभावित करते हैं। इसके अलावा ये ऐसे लीडर हैं जिनके भारत के शुरुआती परवरिश का असर, उनके जीवन के अनुभवों और शिक्षा का एक महत्वपूर्ण घटक बना रहा है। ये “मेड-इन-इंडिया मैनेजर” हैं।

लगभग एक साल पहले रंजन बैनर्जी और आर गोपालकृष्णन दोनों ने इस घटना पर चर्चा शुरू की, जैसा कि बैनर्जी अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखते है:

“हमने कई ऐसे लोगों से बात की, जिनके साथ हमने एमबीए और इंजीनियरिंग का अध्ययन किया था, जो आज दुनिया भर कि बेहद सफल कंपनियों में उच्च मैनेजमेंट के पदों पर आसीन है। हमने उनसे पूछा “कैसे”, और क्या वे “मेड-इन-इंडिया” मिशन कि मदद से आज वहां हैं?”

सफल अनिवासी भारतीयों के भारत से बाहर जाकर सफल होने का जो आम कारण माना जाता है, वह केवल आलोचना के सिवाय कुछ नहीं है, वह यह कि कुछ ऐसी चीजें हैं जो भारतीयों को भारत में सही तरीके, समय पर, पर्याप्त मात्रा में व आसानी से नहीं मिल पाती हैं, जिनका पता लगाना असामान्य बात नहीं है। बैनर्जी कहते है कि

“हालाँकि, इन वार्तालापों से हमारा अनुभव बिलकुल अलग रहा था। जवाबों ने हमें चौंका दिया। स्त्री और पुरुष जिनसे भी हमने बात कि वे कहते है कि उन्हें भारत में बड़े होने के अनुभव ने, मौलिक तरीकों से सकारात्मक बनाया है।“

इन मुलाकातों से, हमें जानने के लिए कुछ ऐसे घटक मिले जिन्हें हम आगे सूचीबद्ध कर रहे है। जिन्होंने उन्हें समृद्ध और नेतृत्वशील बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी हैं, लेकिन इनमें से कोई भी घटक भारतीयों के लिए अनजान नहीं है। इनमें से कई कारक अन्य विकासशील देशों के नागरिकों के पास भी अलग-अलग माप में मौजूद हैं।

इसे समझने के लिए बैनर्जी और गोपालकृष्णन दोनों एक कांसेप्ट यानि “Emergence” या “उद्भव” कि थ्योरी की बात अपनी पुस्तक “The-Made-In-India Manager” में करते हैं, कि यह सिस्टम थ्योरी का एक कांसेप्ट है। इसे समझने के लिए कहा जाए तो फूल की सुंदरता को उसकी एक-एक पंखुड़ियों या फूल के अन्य भागों की सुंदरता को अलग-अलग देखकर नहीं समझा जा सकता, बल्कि इसके सभी भागों को एक साथ यानि समेकित रूप में देखा और महसूस किया जाता है, जो फूल को ज्यादा से ज्यादा सुंदर बनाने के लिए एक साथ आते हैं, तभी हमें इस फूल कि सुन्दरता महसूस होगी, जो फूल की प्राकृतिक संपत्ति है।

  • प्रतिस्पर्धी तीव्रता (Competitive Intensity)
  • विविधता और समावेशन (Diversity and Inclusion)
  • वैचारिक खुलापन (Dealing with Ambiguity)
  • पारिवारिक मान्यता (Family Values)

प्रतिस्पर्धी तीव्रता

प्रीमियर प्रबंधन संस्थान IIM कलकत्ता और SPJIMR, जो यूरोप के प्रमुख बिजनेस स्कूलों के कई छात्रों को नियमित रूप से अपने यहाँ बुलवाते है। SPJIMR प्रतिवर्ष यूरोप के कुछ सर्वश्रेष्ठ बिजनेस स्कूलों के छात्रों का स्वागत करता है। हाल ही में, भारत में प्रबंधन शिक्षा की उनकी धारणाओं को समझने के लिए दस ऐसे छात्रों के साथ एक अनौपचारिक फोकस समूह का संचालन किया गया। साक्षात्कारों के माध्यम से उभरे सुसंगत विषयों में से एक यह था कि:

  1. भारतीय छात्र बहुत मेहनती होते है।
  2. “वे अपने लक्ष्य पर बहुत अधिक केंद्रित हैं,”
  3. उन्होंने आगे कहा कि “भारतीय छात्रों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे अच्छा प्रदर्शन करें।
  4. हम भी उनके आस-पास रहने से अधिक परिश्रमी बन गए हैं।
  5. वे बहुत प्रतिस्पर्धी हैं। ”

ये सभी प्रतिभागी विदेशी छात्र अपने-अपने देशों के सर्वश्रेष्ठ बिजनेस स्कूलों के शीर्ष छात्र थे। व्यक्तिगत तौर पर उन्होंने महसूस किया कि भारतीय छात्र अधिक दृढ़, अधिक केंद्रित और बहुत मेहनती थे। और इसलिए उन्हें हर स्टेज पर काबू पाने के लिए गहन प्रतिस्पर्धा को देखते हुए हर कदम पर आगे बढना होता है। जिसे आप आगे बताये गएआंकड़ो से समझ सकते है:

  1. वर्तमान समय में 1.2 मिलियन छात्र IITs में प्रवेश परीक्षा देते हैं, जिससे से कई दिग्गज आगे आये है।
  2. साल 2017 के हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 में केवल 11,000 छात्रों को IIT में दाखिला दिया गया था, जिनका अनुपात 1:100 से भी कम था।
  3. भारत का सबसे अग्रणी बिजनेस स्कूल IIM अहमदाबाद, हर 400 आवेदनों में से एक छात्र को प्रवेश देता है।
  4. भारतीय स्टेट बैंक, भारत का प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है, जिसने हाल ही में एंट्री-लेवल प्रोबेशनरी ऑफिसर्स के लिए विज्ञापन दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया (मई 2018) के अनुसार इस हर पद के लिए औसतन 550 आवेदन प्राप्त हुए।

ये आंकड़े दर्शाते है कि गहन प्रतिस्पर्धा केवल उच्च शैक्षणिक संस्थानों के लिए ही नहीं है, यह माहौल एक जैसा ही चारों और है।

प्रतिस्पर्धात्मक तीव्रता का अर्थ है कि “मेड-इन-इंडिया प्रबंधक” जहां वे हैं, उस शिखर को बनाये रखने के लिए उनके लिए केवल एकमात्र घटक है और वो है कड़ी प्रतिस्पर्धा को पार करना, और इसी से उन्हें ध्यान, आत्म-विश्लेषण और अभ्यास के महत्व और कठिन दिखने वाले बाधाओं को पार करने कि क्षमता मिलती है।

विविधता और समावेशन

Diversity और Inclusion को कई लोग पहले से ही नजरअंदाज कर देते है, लेकिन जब हम इसकी पड़ताल करते है तो यह बाद में हमें अच्छी तरह से समझ में आती है जब एक अलग या विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक वातावरण में इसी समायोजित किया जाता है। ऐसा प्रदर्शन भारतीयों के जीवन में जल्दी ही शुरू हो जाता है। वैसे स्कूल में दोपहर के भोजन को विभिन्न राज्यों में लोगों के साथ खाना असामान्य नहीं है – जहाँ विशाल व्यंजनों को बाँट कर खाया जाता है, जिसे समझा जाता है और इसकी सराहना की जाती है। इसी तरह स्कूल में ईसाई भजन गाना और रात में हिंदू भगवान से प्रार्थना करना असामान्य नहीं है।

अस्पष्टता के साथ लेनदेन

मौसम की मांग के अनुसार बुनियादी ढांचे की अविश्वसनीयता से हम बहुत सी चीजों से निपटना सीख जाते हैं। अनिश्चित परिस्थितियों का तेजी से आकलन करने, और मदद के लिए सिस्टम की प्रतीक्षा किए बिना ही भारतीय अपने आप में खुद की मदद करने की क्षमता विकसित करते हैं। बैनर्जी के एक मित्र ने तर्क दिया कि बेहद भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेनों में आने-जाने और समय पर काम करने जैसी रोजमर्रा की गतिविधि में भी, छात्रों और काम करने वाले अधिकारियों में हर रोज काम न करने वाली प्रणालियों के अनुकूल होने की क्षमता, और बाधाओं का सामना करने व उन्हें दूर करने का लचीलापन तीव्रता से विकसित होता है।

पारिवारिक मान्यता

एक परिवार के प्रभावशाली पारिवारिक सदस्य के रूप मेड-इन-इंडिया लीडर्स का प्रतिशत उनके पश्चिमी समकक्षों की तुलना में काफी अधिक है। इनमें परिवार कि औपचारिक भूमिका के एक मजबूत कोर मूल्यों के प्रदर्शन के माध्यम से मूल्यों को आकार देने, शिक्षा के मूल्य पर जोर देने और “हमेशा” इनके समर्थन के लिए लचीलापन लाती है।

पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन और सीईओ इंद्रा नूई और माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला, दोनों ने कहा कि उनकी माताओं ने उनकी परवरिश, आकांक्षाओं और मूल्यों पर उनके मजबूत प्रभाव के बारे में हमेशा ही आगे बढने कि बात की है। भारतीय मध्यम वर्ग का छात्र आम तौर पर एक अत्यंत स्थिर पारिवारिक माहौल में बड़ा हुआ है, जिसने उच्च आकांक्षाओं और गहरे आत्मविश्वास को प्रोत्साहित किया है। सत्या नडेला अपनी माँ के बारे में कहते हैं “मेरी माँ ने मेरी ख़ुशी, आत्मविश्वास और वर्तमान में जीने के बारे में गहराई से ध्यान दिया।” इंद्रा नूरी ने अपनी माँ की बेटियों को आगे बढाने कि इच्छा के बारे में की गई बातों के बारे में कहा कि वे “जो कोई भी बनना चाहती हो, बन सकती हैं।” एक विशिष्ट उदाहरण में नूरी इस बारे में बताती हैं कि कैसे उनकी माँ अपनी दोनों बेटियों से डिनर टेबल अपने विचार रखने को कहती थी, कि वे एक विशेष विश्व नेता बनने के बाद क्या करेंगी। इस तरह की भूमिका ने नूरी पर स्थायी प्रभाव छोड़ा।

बाधाओं के सामने उपलब्धि से आत्मविश्वास का निर्माण होता है। कुछ विद्यार्थीयों में इस स्टेज में उपलब्धियां अकादमिक डोमेन में आत्मविश्वास पैदा करती हैं जबकि दूसरों में आत्म-जागरूकता की कमी होती है।

प्रबंधकीय कार्यस्थल पर नियमों का एक नया सेट है- जो शुरुआती विफलताएं, एक सहायक संस्कृति के साथ मिलकर प्रबंधकों को खुद को समझने और उन विफलता को समझने व अपने अनुभव के माध्यम से यह समझने में मदद करती हैं कि कल की विफलताओं से सीखना आज की सफलता का निर्माण करता है। वे, तब एक गहरा आत्मविश्वास विकसित करते हैं। यह एक शांत आत्म-विश्वास है, एक भावना है जो कहती है, “अगर मैं किसी चीज़ में दिलचस्पी रखता हूं और एक अंतर बनाना चाहता हूं, और मैं अपने सभी प्रयासों को देने के लिए तैयार हूं, तो यह नहीं है कि मैं प्राइमा फेशियल हासिल नहीं कर सकता।” यह कहा जाने की जरूरत नहीं है – एक शांत, दृढ़ संकल्प और अल्पकालिक परिणामों के लिए स्थिर रहने की क्षमता आपकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। यह एक सामान्य गुण नहीं है, और हमें नहीं लगता कि यह जन्मजात है। हमारे प्रबंधक आमतौर पर एक मध्य-कैरियर चरण में इसे प्राप्त करते हैं, और जो लोग पहले वहां पहुंचते हैं वे अक्सर शुरुआती लीडर्स होते हैं।

अब हम उभरने की अवधारणा पर लौटते हैं। मेक-इन-इंडिया मैनेजर की ताकत एक साथ कई आने वाली विशेषताओं से उभरती है, जिसमें “अंग्रेजी में सोचने” की क्षमता होती है। हमारा मानना है कि जैसा कि भारतीय खिलाड़ी, कंपनियां और लीडर्स वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाते हैं, कल का भारत में बनने वाला प्रबंधक, अधिक आत्मविश्वास से भरपूर और आश्वस्त भारत में विकसित होगा और परिणामस्वरूप खुद इन गुणों को प्रतिबिंबित करेगा। इस अर्थ में, यह संभव है कि “मेड-इन-इंडिया प्रबंधकों” द्वारा दर्शाई जाने वाली सॉफ्ट पॉवर आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी।

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