Start Creating Your Time, Stop Manage it

Create Time stop management its

“हम अपने समय का उपयोग ‘तर्कों’ के आधार पर करते है, लेकिन समय ‘भावनाओं’ के हिसाब से चलता है.” –Rory Vaden

टाइम मैनेजमेंट के तरीकों में समय कि मांग के अनुसार बदलाव आता रहता है. ये बदलाव मुख्यतः एक-आयामी, द्वि-आयामी और त्रि-आयामी हुए है, आइये इन्हें समझते है और अपने समय का प्रबंधन और बेहतरीन तरीके से करें ताकि हम अपने लक्ष्यों को आसानी से और निश्चित समयावधि में पूरा कर सकें.

परिभाषा : “भिन्न-भिन्न कार्य करने में लगाये गए समय व उसे करने के क्रम को सोच-विचार कर ठीक से व्यवस्थित करने को ही समय प्रबंधन (Time management) कहा जाता है। समुचित समय प्रबंधन से दक्षता आती है, उत्पादकता बढ़ती है और कार्य सही समय पर पूरे होते हैं।“

एक-आयामी समय-प्रबन्धन विचार

साल 1850-60 के आसपास जब ओद्योगिक क्रांति कि शुरुआत हुयी तब यह महसूस किया जाने लगा कि अगर ज्यादा प्रोडक्शन करना है तो काम करने वाले कर्मचारियों कि दक्षता यानि Efficiency बढाने के लिए समय प्रबन्धन कि आवश्यकता है. यह दक्षता बढाने वाले समय प्रबन्धन का विचार एक आयामी विचार था.

इसे मजदूरों, मैनेजरों, कर्मचारियों को यह विचार दिया गया कि वे अपने निश्चित समय में ज्यादा से ज्यादा काम कैसे करें. इसी विचार के साथ इस “एक आयामी” विचार को प्रयोग में लाया जा रहा था. समय प्रबन्धन के विषय में पढाने वाले भी दक्षता कैसे बढायें इसी के आस पास तकनीकें सिखाते थे. यह दक्षता बढाना इतना बढिया विचार है कि अपने समय का उचित प्रबन्धन करके इससे कई गुना ज्यादा काम करके अपनी आमदनी को कई गुणा बढाया जा सकता है.

इस विचार से हमने उन टिप्स और ट्रिक्स, उपकरणों और तकनीकों, कैलेंडर और चेक-लिस्ट का आविष्कार कर लिया है जिनके द्वारा हम अपने समय का उचित प्रबंधन कर सकते है.

द्वि-आयामी समय प्रबन्धन विचार

साल 1980 के आसपास यह महसूस किया गया कि दक्षता को और ज्यादा बढ़ाने के लिए समय का प्रबन्धन Urgency और Importance के आधार पर किया जाना चाहिए. इसके अंतर्गत किये जाने वाले कामों कि To-Do-List को तत्काल और महत्वपूर्ण कार्यों कि प्राथमिकता के आधार पर यानि सबसे महत्वपूर्ण व तत्काल कार्य को लिस्ट में सबसे पहले स्थान पर व्यवस्थित करना होता है.

इसका उल्लेख सबसे बेहतरीन तरीके से डॉक्टर स्टेफेन कावी ने अपनी टाइम मैनेजमेंट मैट्रिक्स में किया है. जो यह बताती है कि अपने कामों कि प्राथमिकता, काम कि आवश्यकता यानि तत्काल किये जाने वाले व महत्वपुर्ण कामों को पहचानकर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर करने से हम अपने समय का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सकते है.

Time Management Matrix Dr Stephen Covey
Time Management Matrix Dr Stephen Covey

यह मैट्रिक्स हमें अपने कामों कि प्राथमिकताओं के हिसाब से महत्वपूर्ण To-Do-List बनाना सिखाती है. मान लीजिये आपने अपने हर 1 घंटे समय को 15-15 मिनट के बराबर हिस्सों में बाँट लिया है, अब आप अपने कामों को इनमें लिखते है कि किस समय क्या करना है. आप देखते है कि आपका कोई एक 15 मिनट का बॉक्स खाली रह गया है तो इसे देखते ही सबसे पहला कौनसा विचार आपके दिमाग में आता है? खाली समय, मतलब समय कि बर्बादी!

लेकिन क्या हम वास्तव में समय को मैनेज कर सकते है? नहीं, यह एक गलत धारणा है कि हम समय को मैनेज कर सकते है. हम समय को मैनेज नहीं कर सकते क्योकिं समय तो अपने हिसाब से निरंतर चलता रहता है. हम केवल अपने आपको व अपनी प्राथमिकताओं को ही मैनेज कर सकते है व उनके अनुसार काम कर सकते है.

त्रि-आयामी समय विचार

आज समय कि मांग बदल चुकी है, काम करने के तौर तरीके बदल चुके है, इसी कारण समय प्रबन्धन के तरीके या विचार भी बदल चुके है. आज के इस सुचना युग में इंसानों को समय के मल्टीप्लायर / Multiplier स्वरूप कि आवश्यकता है.

मल्टीप्लायर विचार

हमें आज अपनी To-Do-List को दुबारा देखने कि आवश्यकता है और उसमें अब हमें इन तीन तत्वों के हिसाब से इसे दुबारा से व्यवस्थित करने कि आवश्यकता है. ये तीन तत्व है:

  1. Important : यह कितना महत्वपूर्ण है.
  2. Urgent : इसे कितना जल्दी करना है.
  3. Significance : यह कितना आगे तक फर्क पैदा करेगा.

मल्टीप्लायर या Significance कैलकुलेशन का मतलब है कि “मै आज वह कौनसा काम करूँ, जिससे मेरा आने वाला कल यानि भविष्य उज्जवल हो सके.” हमें अपने समय को मल्टीप्लायर / गुणात्मक करने के लिए अपने कामों कि Significance कैलकुलेशन करनी होगी.

हम यह सोचते है कि हमारे पास एक दिन में केवल 24 घंटे, 1440 मिनट या 86400 सेकंड ही होते है, यह विचार तब तक हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, जब तक हम अपने समय को मल्टीप्लायर / गुणात्मक करने के लिए significance कैलकुलेशन नहीं करते.

हम अपने समय को मल्टीप्लायर कर सकते है?

“अपने समय को गुणात्मक / मल्टीप्लायर करने के लिए यह आवश्यक है कि आज आप उन चीज़ों पर समय बिताने की भावनात्मक अनुमति देते है जो आपको भविष्य में और अधिक समय देंगी।“ यह महत्वता कि गणना यानि Significance Calculation से सम्भव होता है.

Multiplier’s Thought Process

Roy Vaden के अनुसार कामयाब लोगों से जब पूछा गया और उनके सोचने व कार्य करने वे विचारों का विश्लेषण किया गया तो पता चला कि उनका अपने कामों को To-Do-List में व्यवस्थित करने के तरीके से ही वे इतने कामयाब है और अपना काम बिना किस अड़चन के करते है. इस विचार का एक प्रोसेस है जिसे वे अपनाते है. आइये हम इसे Roy Vaden के The Focus Funnel के माध्यम से समझते है:

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Roy Vaden’s The Focus Funnel

आमतौर पर हमारे पास ढेर सारे काम तो होते है लेकिन हम उन्हें सूचीबद्ध नहीं करते, (जिसे कामयाब लोग करते है, अगर आप करते है तो आप भी कामयाब लोगों में शामिल है) जो एक गलत और भाविष्य में कष्ट देने वाली आदत है. सबसे पहले हमें रोजाना / सप्ताहिक / पाक्षिक / मासिक / अर्धवार्षिक व वार्षिक करने वाले कामों को सूचीबद्ध करें, जिन्हें हमें वरीयता के अनुसार व्यवस्थित करना है. अमीर और कामयाब हमेशा अपने वर्तमान में व भविष्य में करने वाले कामों को सूचीबद्ध करते है. क्योकि नेपोलियन हिल कि पुस्तक “Think and Grow Rich” के अनुसार अव्यवस्थित रहने वाले इंसानों के पास कभी किस्मत / दौलत नहीं आती है.

इस कार्य सूचि या To-Do-List को बनाने में प्रयोग होने वाली प्रोसेस में 5 चॉइस और उन्हें शुरू करने के लिए 5 परमिशन है:

Choice          -   Permission
  1. Elinimate – Ignore
  2. Automate – Invest
  3. Delegate – Imperfect
  4. Now (Concentrate) – Protect
  5. Later (Procrastinate) – Incomplete
  6. Elinimate / हटाना

इस स्टेप में हमें उन कामों को पहचान कर हटाना या इग्नोर करना होता है जो काम हमें भविष्य में ज्यादा समय नहीं दे पायेंगे यानीं हमारे लिए ज्यादा समय का निर्माण नहीं कर पायेंगे. इसे “Permission to Ignorance” कहा जाता है. हमें उन कामों को ना कहना होता है जिन कामों से जिनसे हमें लगता है कि हमारा थोड़ा तात्कालिक लाभ तो होता है लेकिन लम्बे समय में ये हमारे समय को बर्बाद करते है, और जिन्हें करने के बाद हम खेद / Regret प्रकट करते है कि काश मैंने ना कह दिया होता.

प्रेरक वक्ता, लेखक और बड़े बिजनेसमैंनों ने समय समय पर कहा है कि “बहुत ज्यादा हासिल करने के लिए कुछ कामों को ना कहने कि आदत डाल लें”.

इसके कई उधाहरण है जैसे हर समय अपना इनबॉक्स, फेसबुक, वाट्सएप्प आदि चेक करते रहना, खबरों सम्बंधित अखबार, मैगजीन पढ़ते रहना, टीवी देखते रहना (इसमें व्यक्तिगत विकास या अपनी किसी स्किल को बढाने के लिए पढने वाली या देखने वाले प्रोग्राम शामिल नहीं है), गपशप या इधर-उधर कि बेतुकी बातें करते रहना, या अन्य जो आपको लगती है कि ये वर्तमान व भविष्य में आपके समय को बर्बाद करेंगी, उन सभी आदतों व कार्यों को अपनी सूचि से Eliminate करें / हटा दें.

Automate / स्वचालित

इस स्टेप के अंतर्गत हमें उन कार्यों पर ध्यान देना होता है जो eliminate प्रोसेस के बाद कार्यसूची में बने हुए है. अब हमें यह देखना है कि इन कार्यों में एसे कौनसे कार्य है जिन्हें हम स्वचालित तरीके से कर सकते है, जैसे उधाहरण के तौर पर अपने बिलों का भुगतान करना, हम अपने बिलों का भुगतान अपने अकाउंट कि ऑटो बिल पेड सेवा का प्रयोग करके कर सकते है. जिससे भविष्य में हमारे लिए ज्यादा समय बचेगा. इसी तरह के और भी काम आपकी सूचि में हो तो उन्हें भी ऑटोमेशन प्रोसेस में डाल कर आप अपने भविष्य का बहुत सारा समय बचा सकते है. इसे हम “ROTI” यानि ‘Return on Time Invested’ कहते है.

इसके द्वारा आप अपने बचे हुए समय का प्रयोग धन कमाने के कामों में लगा सकते है, जिसे हम धन को इन्वेस्ट करने का नाम देते है. क्योकिं इन गतिविधियों में लगने वाले समय से आपके कमाने के समय कि कीमत ज्यादा होती है. जिससे आपको अभी के, थोड़े भुगतान से भविष्य में उससे कई गुणा ज्यादा कमाने का अवसर मिलेगा.

Delegate / काम सोंपना

दुसरे स्टेप के बाद अब जो काम आपकी सूचि में बचे है उनमें से वो काम चुनें जिन्हें करना आवश्यक है लेकिन आप उन्हें करने में निपुण नहीं है, जैसे मान लीजिये आप एक जिम का संचालन / मैनेजमेंट करते है, आप उसमें प्रयोग होने वाली मशीनें, संगीत आदि खुद नहीं बनाते है, आप अगर एक से ज्यादा जिम मैनेज कर रहे है तो आपको उनके लिए ट्रेनर भी चाहिए होंगे, आपको ये सभी काम किसी दुसरे से करवाने होते है, ताकि आप अपने समय को अपने दुसरे महवपूर्ण कार्य के लिए बचा सकें. इसके लिए यह आवश्यक है कि आप सही व्यक्ति चुनें और यह सुनिश्चित करें कि जिस व्यक्ति को आप कार्य सौंपते हैं, वह कार्य करने में सक्षम हो।

डेलिगेट किये गए कार्य के लिए स्पष्ट लक्ष्य, मानक और समय सीमा निर्धारित करें। एक समय सीमा तय किये बिना यह केवल मात्र एक चर्चा ही साबित होती है। यदि आपके डेलिगेट किये गए काम जिन्हें आपने अपने काम को सोंपा है वे समय पर और बजट पर हैं, तो उन्हें बार बार टोकने कि आवश्यकता नहीं है। आप मान सकते हैं कि उनके पास आपका काम नियंत्रण में है।

यह काम अपने लोगों को विकसित करने की भी कुंजी है, और यह आपके अपने प्रभावी नेतृत्व कौशल को विकसित करने कि भी कुंजी है.

उत्कृष्ट प्रबंधन कौशल वाले सभी प्रबंधक उत्कृष्ट डेलिगेट करने वाले होते हैं। इससे आपको भविष्य में अपने लिए समय मिलेगा और यह कि आपके इस स्टेप को फॉलो करने से आप अपने लिए भविष्य में बहुत सारा समय बना रहे है.

Now (Concentrate) / शुरू करना

अब आपके पास आखिर में वो काम बच गए है जिन्हें आपको प्रोटेक्ट करना है और इन्हें तुरंत शुरू कर देना चाहिए. ये वो काम है जो आपको यह भावनात्मक परमिशन देते है कि आप आज इन्हें करके भविष्य में अपने लिए समय का निर्माण कर सकेंगे और अपने लिए भविष्य में ढेर सारी दौलत बना सकेंगे.

दौलतमंद और कामयाब इंसान वो काम करते है, जिन्हें करने से उनके लिए समय बनता है. आप किसी भी कामयाब इंसान कि जीवनी उठाकर देख सकते है कि उन्होंने बहुत सारे कामों को ना कहा था, उन्होंने बहुत सारे कामों ऑटोमेट और डेलिगेट किया था. और अपने लिए वो काम बचाकर रखे जिन्हें करने से उन्हें वो मिला जिसे उन्होंने चाहा था. ढेर सारी दौलत

Later (Procrastinate)

कुछ ऐसे काम भी इस सूचि में निकलकर आपके सामने आये है लेकिन आपको लगता है कि ये Incomplete है. और इन्हें अभी नहीं करना चाहिए तो इन कामों को दुबारा अपनी To-Do-List में डाल दें व फिर से इसके लिए वही प्रक्रिया अपनाएं जो आपने पहले अपनाई थी.

समय और दौलत के बारे में पूंजीपति, प्रेरक वक्ता और लेखक डैन लॉक के अनुसार समय ही पूंजी है, इसे समझने के लिए वे एक उधाहरण देते है, मान लीजिये एक इंसान 40 साल तक काम करके लगातार 25000 डॉलर सालाना कमाता है, जिससे वह अपने पुरे जीवन काल में 1 मिलियन डॉलर कि धनराशी कमा लेता है.

अब प्रश्न यह है : क्या आप इस इंसान को ‘मिलियनेयर’ कह सकते है? नहीं …..

अगर एक इसान एक साल में एक मिलियन डॉलर कमाता है, एक दूसरा इंसान इसी पैसे को एक महीने में कमाता है, और एक तीसरा इसी धनराशी को एक सप्ताह में कमाता है, इनमें से कौन ज्यादा अमीर है? यहाँ पर 40 साल में वह धनराशी कमाने वाले इंसान से एक साल में एक मिलियन राशि कमाने वाला इंसान ज्यादा अमीर है, और एक महीने में कमाने वाला एक साल वाले से ज्यादा अमीर है व एक सप्ताह में इतनी धन राशि कमाने वाला एक महीने में कमाने वाले से कहीं ज्यादा अमीर है. इसमें धनराशि एक समान है केवल समय कि मात्रा ही तो बदली है.

अतः यहाँ पर समझने योग्य बात यह है कि किसी को मिलियनेयर कहलवाने के लिए एक ख़ास समय सीमा में यह धनराशी कमाना आवश्यक होता है. जिससे साबित होता है कि धन हमेशा समय में मापा जाता है और समय धन से ज्यादा कीमती है.

अब से अपने समय का प्रबंधन करने कि बजाए समय का निर्माण करें और अपने आप का व अपने कार्यों का प्रबंधन इस तरह से करें ताकि आप आज वह काम कर सकें जिसे करने से आप भविष्य में ज्यादा समय, ज्यादा दौलत और ज्यादा आजादी हासिल कर सके.

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