Fundamental Law, What is Success Hindi Audiobook

सफलता क्या है? बुनियादी सिद्धांत हिन्दी औडियोबुक

Fundamentals of Success and Happiness for life.


रोजर डब्ल्यू बाबसन द्वारा लिखित बुक What is Success Hindi Audiobook के चैप्टर एक में आपने जाना कि जो लोग महान हूएं है, उन्होंने अपने जीवन को किन सिद्धांतों के आधार पर चलकर महान बनाया है। दूसरे चैप्टर में यह जाना कि सफलता के लिए सही बिजनस ग्रुप और सहयोगी का चुनाव कितने इम्पॉर्टन्ट होता है।


इस तीसरे चैप्टर में लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि कैसे हमारी सफलता, खुशी और समृद्धि को जीवन के छोटे लेकिन इम्पॉर्टन्ट Fundamental Law के द्वारा बढ़ा सकते है। कैसे हम इन्हें अपनाकर एक सुखी और समृद्ध जीवन जी सकते है।

What is success hindi audiobook action and reaction
Chapter 3 Fundamental Law

अध्याय - 3


फन्डमेनल लॉ


अगर पूछा जाए कि दुनिया में सबसे बड़ी चीज क्या है? तो कोई "विश्व युद्ध" का सुझाव दे सकता है। दूसरा सुझाव दे सकता है कि "यूनाइटेड स्टेट्स स्टील कॉरपोरेशन," से बड़ा कोई नहीं है, कोई और "रिपब्लिकन पार्टी," और फिर भी एक और, किसी दूसरी शक्ति का उदाहरण दे सकता है जिसने दुनिया की नियति को आकार दिया है।


लेकिन इस सवाल का मेरा अपना जवाब इन सब से अलग है, क्योंकि मेरा मानना है कि दुनिया में सबसे बड़ी चीज है लॉ ऑफ एक्शन और रिएक्शन यानि क्रिया और प्रतिक्रिया का नियम, यानी हर एक्शन के लिए एक समान और विपरीत रिएक्शन होता है। बेशक वर्ल्ड वॉर का जबरदस्त परिणाम रहा था, लेकिन यह बीती बात है। क्रिया और प्रतिक्रिया का नियम पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर हर समय रहता है। यह गुरुत्वाकर्षण के नियम की तरह हमेशा हमारे साथ रहता है।


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यूनाइटेड स्टेट्स स्टील कॉर्पोरेशन एक बड़ी चीज़ है, और इसकी गतिविधियाँ पूरे विश्व को प्रभावित करती हैं। लेकिन एक्शन एंड रिएक्शन का कानून इस शानदार निगम पर, और हर दूसरे निगम पर पकड़ रखता है। हमारे महान राजनीतिक दल बड़ी चीजें हैं। लेकिन एक्शन और रिएक्शन के कानून की वजह से ही वे गवर्नमेंट में और गवर्नमेंट से बाहर हो जाते हैं जैसे कि एक चक्रवात के बीच थिसलडाउन होता है वैसे। सफलता प्राप्त करने के लिए समान फन्डमेनल प्रिन्सपल का उपयोग किया जाना चाहिए फिर चाहे डाक टिकटों को संभालना हो या लाखों करोड़ों डॉलर।



इसलिए, जब हम सक्सेस की बात करते है तो एक्शन और रिएक्शन के लॉ पर विचार किया जाना आवश्यक हो जाता है। यह नियम दुनिया की सबसे बड़ी चीज है, क्योंकि यह मानव हृदय की भावनाओं को भी नियंत्रित करती है और यही सच्चे धर्म का आधार है।


श्री मद्भागवात गीता में भी श्री कृष्ण, अर्जुन को इसी मूलभूत नियम को समझाते हुए कहते है कि तुम्हारे मन की जैसी भावनाएं रहेंगी, परिणाम भी स्वत: ही उसी के अनुरूप आएंगे, इसलिए रिजल्ट पर नहीं बल्कि अपनी क्रिया यानि एक्शन पर ध्यान दो।

बिजनस कंडिशन्स का चार्ट भी रॉकी माउंटेन स्टेट की चोटियों और घाटियों के क्रॉस-सेक्शन जैसा दिखता है। इसकी नॉर्मल लाइंस से ऊपर की चोटियाँ बिजनस में उछाल जैसी दिखती है। ये ऐसी अवधियाँ हैं जो लापरवाह विस्तार, हिस्टेरिकल गतिविधि और अन्साउन्ड इन्फ्लैशन होती है। नॉर्मल लाइंस से नीचे की valleys बिजनस डिप्रेशन जैसी स्थिति हो जाती हैं, ऐसे समय रुथलेस रेटरिचमेंट यानि निर्मम छंटनी, घबराहट और बेरोजगारी होती है तब सामान्यतया कठिन समय होता है।


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हर बार जब कोई ऐब्नॉर्मल बूम आता है, तो निश्चित रूप से यह एक ऐब्नॉर्मल डिप्रेशन आना स्वाभाविक है। यह एक फन्डमेनल लॉ है की नॉर्मल लाइन के ऊपर एक अच्छा पीरीअड अनिवार्य रूप से लाइन के नीचे एक बड़ी अवधि के बाद आता है।


कुछ पाठक व्यक्तिगत रूप से 1906 की ग्रेट प्रास्पेरिटी को याद करते हैं, लेकिन जैसा की आप जानते है कि इसके ठीक बाद 1907 का पैनिक था। यह अमेरिकी संकट से पहले की ऐक्टिविटी की एक और अवधि थी, जिसके बाद 1914 की सुस्ती आई थी। इसके बाद संकट से पहले उछाल आया और फिर संकट के बाद का उछाल, जिसके बाद 1920 का रिएक्शन हुआ।


अपनी नज़र में, इस चार्ट को अमेरिकी गृहयुद्ध से पहले के दिनों में ले जाता है। इन उथल पुथल भारी कंडिशन्स के दृश्य के रूप में ओल्ड वर्ल्ड के पार, इस चार्ट को ले जाएं।


एक वैज्ञानिक था जिसने कैलिफ़ोर्निया में सैकड़ों साल पुराने विशाल पेड़ों की खोज करने के लिए अपने आप को समर्पित किया था। उसने माइक्रोस्कोप से यह देख कर अनुमान लगाया की ये कितने पुराने थे, जिसे उसने हर लेयर को एक दशक में बना हुआ माना। इस तरह वह यह साबित करने में सक्षम हुआ कि सुदूर पुरातनता में भी, अत्यधिक उर्वरता के एक समय के बाद अकाल की का भी समय आया था, और अकाल की हर अवधि के बाद प्रजनन की अवधि होती है।


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इसलिए, यह मत समझो कि एक्शन और रिएक्शन का कानून नया है या आधुनिक बिजनस का एक गुजरता हुआ चरण है, इसी तरह यह नया नया उलझ हुआ है जिनके बारे में अभी सुना गया है। लेकिन वास्तव में यह मानव इतिहास का सबसे स्थायी तथ्य है।


यह फन्डमेनल लॉ दुनिया की सबसे बड़ी चीज है क्योंकि यह हर पुरुष, महिला और बच्चे के जीवन को आकार देता है। एक आदमी सफल होता है या नहीं यह काफी हद तक इस कानून की उसकी समझ पर निर्भर करता है। आपने शायद कुछ समय पहले अखबारों में पढ़ा होगा कि इंडस्ट्री के एक महान कैप्टन को ऑटमोबील corporation से जबरन बाहर कर दिया गया था, जिसके वे मुखिया थे। एक अन्य को उस विशाल टायर corporation का नियंत्रण त्यागना पड़ा जिसे उसने बनाया था।


कुछ महीने बाद आपने पढ़ा कि कॉमर्स की दुनिया में एक और विशाल शख्सियत ने अपने निजी अस्तबल को बेच दिया था और 50 लाख डॉलर के नुकसान को पूरा करने के बेताब प्रयास में अपनी संपत्ति को बाजार में फेंक दिया था। इन लोगों का अपने समय में एकछत्र राज था, लेकिन उन्होंने इस मूलभूत नियम की अवहेलना करने का प्रयास किया। अगर कोई नियाग्रा फॉल्स के कगार पर खड़े होने की कोशिश करेगा तो वह अपने पैर जमाने में असफल ही रहेगा।


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अगर ये लोग-जो बिजनस वर्ल्ड के ये सुपरमैन थे – जो तूफान के सामने झुके हुए थे, अगर उस समय किसी ऐसे विनम्र मजदूर से मिलते, जिसने अपनी नौकरी खो दी थी, तो उन्होंने शायद उसका हाथ पकड़ कर कहा होता, "मेरे भाई!", यह मौलिक कानून कोई रैंक या रेटिंग नहीं जानता। यह हम सभी के साथ समान रूप से व्यवहार करता है - अमीर या गरीब, पश्चिमी, पूर्वी, उत्तरी, दक्षिणी, कसाई, बेकर, और मोमबत्ती बनाने वाला फिर चाहे कोई भी हो।


प्रत्येक पाठक के लिए क्रिया और प्रतिक्रिया के नियम का क्या अर्थ है, इसका एक सरल उदाहरण यहां दिया गया है। यह पत्र जनवरी, 1908 को न्यूयॉर्क शहर के एक युवक ने अपने लोगों को लिखा था। यह बिजनस डिप्रेशन के समयमें लिखा गया था:-


"प्रिय माँ - मैंने अभी तक हिम्मत नहीं हारी है – और मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा - लेकिन यहाँ मेरे सफल होने की बहुत कम संभावना है। मैं अपने जीवन में पहले से कहीं ज्यादा मेहनत कर रहा हूं, काम पाने की कोशिश कर रहा हूं। मैंने हर अखबार में हर विज्ञापन का जवाब दिया है।


मैंने उन सभी लोगों को बुलाया है जिन्हें जनगणना करने वाले ने बुलाया था और कुछ और भी जो मुझे यकीन है कुछ उनसे छूट गए थे। मुझे लगता है कि मैं अच्छा नहीं हूँ। आपको यह जानकार खुशी होगी कि, एक आदमी ने आज मुझसे कहा कि वह मेरा नाम फाइल में डाल देगा, चाहे इसका कोई भी मतलब हो।


सभी को ढेर सारे प्यार के साथ,"


एलेक


यह पत्र कुछ माताओं और पिताओं को परिचित लग सकता है। शायद आपको अपने ही बेटों से ऐसे पत्र मिले हों। आप पंक्तियों में पढ़ सकते हैं, और आप जानते हैं कि वह लड़का किसका विरोध कर रहा था। आप उसे देख सकते हैं, वह दुनिया में सबसे कठिन काम से थके हुए एक नौकरी की तलाश कर रहा है – उसके पैरों में दर्द है, वह दिल से बीमार है, लेकिन फिर भी एक हंसमुख चेहरे के साथ वह लिख रहा है की चिंता मत करों, उसने ऐसा इसलिए किया ताकि ऐसा न हो की उसके पेरेंट्स उसकी चिंता में डूब जाएँ।


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इस लड़के का तब क्या होता अगर उसकी माँ उसे अपनी स्थिति के असली तथ्य लिख देती। मान लीजिए उसने उसे बताया होता कि काम खोजने में इतनी मेहनत का कारण यह नहीं था कि वह "अच्छा नहीं" था, इसलिए नहीं कि एक युवक के पास सफल होने का कोई मौका नहीं था, इसलिए नहीं कि वहां नीचे कोई जगह नहीं थी, बल्कि वह उसे यह समझाती की सिर्फ इस मौलिक कानून के अस्थायी आंदोलन के कारण वह अपना काम न खोजे, क्योंकि वह तो उसे मिलने ही वाला है।


तब वह उसे समझा सकती थी कि यदि वह कुछ न करता होता, तो या कानून बहुत देर बाद में उसकी मदद करता, लेकिन उससे पहले वह विकलांग हो जाता। जब तक लॉ अपना काम करता तब तक बहुत देर हो जाती।


जिस व्यक्ति ने यह पत्र लिखा है उसके पास आज एक खुशहाल परिवार और एक अच्छा बिजनस है। वे आज सफल है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इस पत्र को प्रदर्शित किया, जिसे उनकी मां ने सहेजा था, "इसे देखकर मैं थोड़ा मुस्कुराता हूँ, लेकिन मुझे आशा है कि जब मैं उस रात इसे लिखने के लिए बैठ था, तो मैं सोच रहा था की मैं कभी भी बेमोत नहीं मरूँगा! मैं यह समझ गया था कि इस दुनिया में कितने ही वास्तविक दुख है जिनसे केवल इनका असली कारण समझकर उनसे बचा जा सकता है।


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जो इस डिप्रेशन के समय में डर की वजह से अपनी जान गंवा चुके है, अगर उन्हें केवल यह एहसास होता है कि यह केवल बिजनस परिस्थितियों में एक स्विंग मात्र है जो जल्द ही खत्म हो जाएगा। तो वे आज हमारे बीच एक सफल जीवन जी रहे होते।”


यहां एक और पत्र है जो उन पाठकों के लिए रुचिकर हो सकता है जो पत्र पसंद करते हैं क्योंकि वे वास्तविक मानवीय दस्तावेज हैं न कि सूखे सिद्धांतों की अभिव्यक्ति। यह पत्र एक युवती ने लिखा था:-


18 अक्टूबर, 1919


"मेरे प्रिय मिस्टर बाबसन- कृपया यह न सोचें कि मैंने बाबसन अनैलिसिस organization के साथ अपने काम का आनंद नहीं लिया है। यह सबसे अनुकूल रहा है, और मुझे आशा है; मैं उपयोगी रही हूं। मैंने निश्चित रूप से बेहतर बनने की कोशिश की है। मेरे इस पद से इस्तीफा देने के लिए आपको यह पत्र भेजने का मेरा एकमात्र कारण यह है कि मुझे एक दूसरी कंपनी में एक इससे बेहतर पद की पेशकश की गई है, और वे मुझे यहां की तुलना में बहुत अधिक वेतन देने वाले है। हालांकि व्यक्तिगत रूप से हाई सैलरी मुझे अपनी नौकरी बदलने के लिए प्रभावित नहीं करेगी, लेकिन वास्तव में मेरे साथ मेरा परिवार भी है जो मुझ पर निर्भर है। मुझे वास्तव में लगता है कि यह मेरे लिए एक गंभीर फैसला है।


"मुझे हमेशा आपके काम में और उस संगठन में बहुत दिलचस्पी होगी, जिसमें मैं कई दोस्तों को छोड़ कर जा रही हूं। आपने मेरे लिए जो कुछ किया है उसके लिए मैं आपकी हमेशा आभारी रहूँगी।"


आपकी

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ध्यान दें कि यह पत्र अक्टूबर, 1919 में लिखा गया है। उस समय अक्टूबर, 1919 में क्या हो रहा था? उस समय बिजनस फलफूल रहे थे। सभी अपने अपने काम में लगे हुए थे। सभी को मोटी तनख्वाह और अन्य अलावन्स मिल रहे थे। बिजनस organization एक-दूसरे के एम्प्लॉईस को अपने पास लाने की कोशिश कर रहे थे, जैसे एक दूसरी कंपनी ने इस लड़की को बाबसन के ऑफिस से अपने पास आने के लिए अट्रैक्ट किया था।


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वह एक वैल्यूबल एम्प्लोयी थी, उन्हें उसका वेतन बढ़ाना और इस तरह के अन्य प्रस्ताव को पूरा करना चाहिए था। लेकिन यह बाकी सभी के साथ अन्याय होता इसलिए यह असंभव था, केवल एक ही काम करना था कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाए, साथ ही साथ उन्हें अपना पद छोड़ने के खिलाफ दृढ़ता से सलाह दी जाए। हालाँकि, सलाह को स्वीकार नहीं किया गया था।


फिर क्या हुआ? यह समय किसी हनीमून पीरीअड की तरह खुशी से चला गया। और फिर, लगभग 1920 के मध्य में, डाउन्फॉल का समय आ गया। बिजनस नीचे की ओर खिसकने लगे। बिजनस organization में छटनी होना शुरू हो गया, कर्मचारियों को छुट्टी दे दी गई। जिस विशेष कंपनी ने फैंसी वेतन के लालच में लड़की को बहकाया था, वह अब पीट चुकी थी और उसे छुट्टी दे दी। उसे लगा कि वह फेल हो गई है। वह पूरी तरह निराश हो गई थी।


उसे दूसरी नौकरी करने का आग्रह करने के बजाय, जैसा कि उन्होंने किया, उसके माता-पिता को उसे यह मौलिक कानून समझाना चाहिए था। कोई भी माता-पिता जो अपने बच्चों को बिजनस डिप्रेशन के कगार पर एक सुरक्षित नौकरी छोड़ने की अनुमति देते हैं, वे न केवल ऐसी फाइनैन्शल हेल्प खोने के पात्र हैं, बल्कि वे अपने बच्चों के आत्मविश्वास और सम्मान को भी खत्म कर रहे है।


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युवाओं के लिए महत्वाकांक्षा रखना जायज है। बेशक, हम चाहते हैं कि वे सफल हों। लेकिन उनके प्रति अपने प्रेम को सफलता के मूलभूत नियम से आंखें न मूंद लेने दें। सफलता के लिए हमारी महत्वाकांक्षा को अंधी महत्वाकांक्षा न बनने दें। डिप्रेशन के समय उन्हें आत्मविश्वास और आशा, साहस और उद्यम सिखाएं। और ग्रेट प्रास्पेरिटी के समय में स्थिरता, विवेक, सावधानी, सतर्कता और सेवा सिखाते हैं।


दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ और महान लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी सफलता का अधिकांश हिस्सा अपनी मां से सीखे गए सबक और एक बुद्धिमान पिता की सलाह के कारण है। ओह, अगर उन सभी पाठों और सलाहों में एक्शन और रिएक्शन के फन्डमेनल लॉ के बारे में निर्देश शामिल हो सकते हैं! जैसे दुनिया में यह कैसे काम करता है, फन्डमेनल लॉ कैसे संचालित होता है, यह हमें कैसे बनाता है या तोड़ता है, इसकी स्पष्ट समझ के साथ युवाओं के दुनिया में जाने के लिए यह कितनी अमूल्य विरासत है।


क्योंकि हम इससे लाभ लेने के लिए इसके अनुसार अपने syllabus को आकार देते हैं। अपनी शक्ति को व्यर्थ ही गँवाने से रोकने की कौशिश करते है। जैसा कि शेक्सपियर ने कहा था: "लोगों के मामलों में हमेशा एक ज्वार होता है, जो बाढ़ में ले जाता है, और वह बाढ़ भाग्य की ओर ले जाती है।" इस ज्वार को पकड़ने का समय ऊपर की ओर लॉंग स्विंग के बॉटम पर होता है।


धन्यवाद, मिलते है अगले चैप्टर के साथ, हिन्दी औडियो बुक डॉट कॉम, आपका दिन शुभ हो!




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