पगडंडीयां छोड़ें, राजपथ चुनें

Updated: Jun 27

हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए सामान्य ज्ञान की बजाये विशिष्ट ज्ञान की आवश्यकता होती है। सामान्य ज्ञान और विशिष्ट ज्ञान में क्या अंतर होता है इसे इस उदाहरण से समझते है।


रमेश और सुरेश दो दोस्त है, दोनों ने अभी-अभी ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। दोनों ही आगे बढ़ने के लिए सेल्स प्रोफेशन को अपनाने का फैसला करते है। रमेश सेल्स सीखने के लिए एक बेहतरीन प्रबंधन संस्थान में MBA के सेल्स स्पेशलाइजेशन कोर्स में भाग ले लेता है और सुरेश सेल्स सीखने के लिए किसी बढ़िया नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी को ज्वाइन कर लेता है। जिसका ट्रेनिंग प्रोग्राम बहुत बेहतर होता है।


दोनों ही दोस्त बहुत मेहनती है। उनमें अपने द्वारा लिए गए निर्णयों के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना से काम करने की आदत है। वे जिस भी काम को हाथ में लेते है उसे पूरा करके ही दम लेते है।


वे अपने-अपने कामों में इतने व्यस्त हो गए थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि तीन साल कितनी जल्दी बीत गए।

वैसे तो वे मिलते रहते थे लेकिन आज तीन साल बाद रमेश और सुरेश अपने शहर की एक कॉफ़ी शॉप पर मिलते है। आज रमेश एक बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनी में सेल्स मैनेजर के पद पर काम कर रहा है। जहाँ पर उसे आठ सेल्स एग्जीक्यूटिव की टीम उसे रिपोर्ट करती है। इस पद पर रमेश का सालाना पॅकेज 6 लाख रूपये है। इसी दौरान रमेश ने अपने पद के रुतबे के हिसाब से एक गाड़ी भी खरीद ली है।


सुरेश जिस नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के साथ काम कर रहा है। वहां पर तीन साल की मेहनत के बाद आज उसकी टीम तीन हजार से ज्यादा सदस्यों की हो गई है। जो दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। सुरेश भी सालाना 6 लाख रूपये के आस पास कमाता है। इसने भी गाड़ी खरीद ली है।


आज दोनों ही अपने सौभाग्य पर बहुत खुश है। वे कॉफ़ी पीते हुए एक दुसरे का हाल चाल पूछते है और अपने अनुभव साँझा कर रहे है।


इसी दौरान कैफेटेरिया में लगे हुए बड़े से एलसीडी स्क्रीन में चल रही ब्रेकिंग न्यूज़ पर दोनों की निगाह पड़ी। और दोनों ही अपनी जगह से अचानक उठकर लगभग दौड़ते हुए उस टीवी तक पहुंच गए।


टीवी में यह समाचार दिखाया जा रहा है कि सरकार ने काफी सारी विदेशी कम्पनियों की मोबाइल एप्स बैन कर दी है। साथ ही साथ यह समाचार भी दिखाया जा रहा था कि सरकार ने कुछ नेटवर्क मार्केटिंग कम्पनियों पर कड़ी कार्यवाही करते हुए जाँच के आदेश दिए है। साथ में यह भी आदेश परीत किया है कि जाँच पूरी होने तक उनके सभी बैंक खाते सील कर दिए है। उन कम्पनियों को हिदायत दी गयी है कि उन्हें अपना ऑपरेशन रोकना होगा।


दुर्भाग्य से रमेश और सुरेश जिन कम्पनियों के साथ काम कर रहे थे उनका नाम इस लिस्ट में शामिल है।


यह समाचार सुनते ही दोनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। दोनों के दिमाग अचानक से कुछ समय के लिए सुन्न पड़ गए। दोनों के चेहरों के रंग सफेद हो गया। उनकी साँसों कि गति तेज हो गई और उस वातानुकूलित हॉल में भी उनके चेहरे पर पसीने की बूंदें साफ़ दिखाई दे रही है। उनकी आँखों में आंसू तो है लेकिन वे बाहर दिखाई नहीं दे रहे है। वे बस टीवी की और टकटकी लगाये हुए देख रहे है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि यह क्या हो रहा है। कैसे एक सरकारी आदेश से उनका सौभाग्य अचानक दुर्भाग्य में बदल गया।


दोनों ही पास में पड़ी हुई कुर्सियों पर निढाल होकर बैठ गए। कुछ समय तक दोनों ही कहीं शून्य में खोये हुए इसी तरह चुपचाप बैठे रहे। उन्हें अपने आस पास हो रही हलचल का अहसास भी नहीं है और न ही उन्हें आस पास हो रहे बातचीत का कोई शौर सुनाई दे रहा है। बस उनके दिमाग में केवल सन्नाटा है और कुछ भी नहीं है।


“साहाब आपका बिल” जब वेटर ने दो तीन बार जोर से कहा तब अचानक से दोनों इस शून्य से बाहर आये। और सुरेश ने उसे दो कॉफ़ी का आर्डर और दिया व बिल साथ में लाने को कहा।


फिर दोनों ने आपस में बातचीत किये बिना ही अपने मोबाइल फोन निकले और अपने किसी ख़ास से इस सिलसिले में बातचीत करने लगे।



उन्होंने फोन पर सबसे पहले क्या बात की होगी?


हर इंसान विशेषकर किसी भी संकट कि स्थिति में अपने उपलब्ध ज्ञान के आधार पर इससे निपटने का निर्णय लेता है। रमेश और सुरेश ने भी वही किया और उन्होंने अपने सीनियर से इस मामले पर फोन करके स्थिति और आगामी रणनीति पर बातचीत की। स्वाभाविक है कि उनके सीनियरों ने कहा होगा कि अब यहाँ कुछ नहीं बचा है उन्हें दुसरे अवसरों कि खोज शुरू कर देनी चाहिए।


इस बारे में आगे बताये जा रहे चार सवालों का जवाब आप कमेन्ट बॉक्स में लिख कर दे सकते है-


  1. नई जगहों से दोनों में से किसके पास ज्यादा निमंत्रण होंगे? रमेश या सुरेश

  2. किसे जीरो से शुरू नहीं करना पड़ेगा? रमेश या सुरेश

  3. किसे कम नुक्सान उठाना पड़ेगा? रमेश या सुरेश

  4. भविष्य में कौन बेहतर स्थिति में होगा? रमेश या सुरेश

अगर आपके चारों सवालों का जवाब सुरेश है तो बहुत बढ़िया। आप भी उन विशेष लोगों में शामिल है जो अपने विशिष्ट ज्ञान का प्रयोग करते है।


“अधिक प्राप्त करने की प्रक्रिया” पुस्तक के अनुसार “सामान्य ज्ञान से केवल नौकर बना जा सकता है, लेकिन मालिक बनने के लिए विशिष्ट ज्ञान की आवश्यकता होती है।“

रमेश के सीनियर भी सामान्य ज्ञान के ही विद्यार्थी है जो उसे यही सलाह देंगे कि दूसरी नौकरी खोजो और उसमें मेहनत करो जिससे तुम तरक्की कर सको। जबकि सुरेश के सीनियर विशिष्ट ज्ञान के विद्यार्थी है वे उसे यह सलाह देंगे कि दूसरी ज्यादा बेहतर कम्पनी यह है जिसमें हम अपनी पूरी टीम के साथ जायेंगे जहाँ पर हमें बेहतर अवसर मिल रहे है। जहाँ हमारे साथ हमारी टीम भी ज्यादा तरक्की करेगी।


दोनों ही सेल्स के प्रोफेशन में है लेकिन दोनों में ज्ञान का केवल एक छोटा सा अंतर है। एक अपने ज्ञान का दूसरों के लिए प्रयोग कर रहा है और दूसरा अपने ज्ञान का प्रयोग खुद के लिए कर रहा है। इसे इस तरह से भी समझ सकते है कि रमेश दूसरों के बाग़ की देखभाल करता है परन्तु सुरेश अपने लिए खुद के पेड़ लगा रहा है और उनकी देखभाल कर रहा है।


हालाँकि रमेश के मालिकों के पास बहुत बड़ा बाग़ है लेकिन रमेश कभी भी इसका मालिक नहीं बन सकता है। हालाँकि सुरेश के पास कुछ ही फलदार पेड़ है परन्तु वह उनका मालिक है। वह मेहनत से जितने चाहे और पेड़ों का मालिक बन सकता है और अपना मुनाफा बढ़ा सकता है। यह इसके लिए रमेश के जैसे पढ़े लिखे समझदार नौकरों को तनख्वाह के बदले में रख सकता है। और अपने बाग़ की बेहतर सेवा करवा सकते है ताकि वह और ज्यादा अवसरों की तलाश कर सके। जबकि रमेश यह नहीं कर सकता है।


आप इसे और गहराई से समझने के लिए “अधिक प्राप्त करने की प्रक्रिया” पुस्तक में जान सकते है। आप यह समझ सकते है कि क्या आप सामान्य ज्ञान के विद्यार्थी है या फिर विशिष्ट ज्ञान के विद्यार्थी है। इस पुस्तक को अगर आप अभी आर्डर करते है तो आपके लिए इस पुस्तक पर लगने वाला शिपिंग चार्ज बिलकुल फ्री रहेगा। आप इसे फ्लिप्कार्ट, नोशनप्रेस और अमेज़न पर भी आर्डर कर सकते है।