Corporate Guru Dhirubhai Ambani Full Hindi Audiobook


Corporate Guru Dhirubhai Ambani Full Hindi Audiobook
Image by : Dinodia Photos / Getty Images

धीरूभाई अंबानी, भारत के नंबर एक इन्डस्ट्रीअल एनर्प्राइज़, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के फाउन्डर चेयरमैन और एक ऐसे व्यक्ति के बारे में इस Corporate Guru Dhirubhai Ambani full hindi audiobook में आप सुनेंगे कि वे कैसे अपने दृढ़ संकल्प की वजह से इतनी ऊंचाई पर पहुंचे की ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। जैसा कि उन्होंने खुद एक बार कहा था, "मेरी सफलता केवल ईश्वर पर निर्भर नहीं है। हालांकि ईश्वर की मुझ पर बहुत कृपा हैं। हां, भाग्य भी होता है, लेकिन उस भाग्य को जगाने के लिए, खुद को इतनी मेहनत करनी होती है, जिससे भाग्य अपने आप ही आपकी और खींचा चला आता है।"


एकमात्र बिजनस हीरो


उनके समकालीन कई दूसरे लोगों की अमीरी की कहानियाँ थी, जिनमें दूसरे व्यापारियों के रईस बेटे, कई बिजनस barons, इन्डस्ट्रीअल लेजन्ड और फाइनैन्शल विज़ार्ड भी शामिल थे। लेकिन उन सभी में केवल अंबानी ही वह एकमात्र व्यक्ति थे, जिन्हें एक बिजनस हीरो माना जाता था। एक ऐसा हीरो जिसे उनके जीवित रहते ही यह खिताब मिल गया था। इसी तरह आज भी उनकी मृत्यु के बाद वे युवाओं में बहुत लोकप्रिय है।



देश की कमर्शियल कैपिटल से शुरुआत


धीरुभाई महज 26 वर्ष की उम्र में फॉर्मल एजुकेशन के साथ भारत की बिजनस कैपिटल बॉम्बे आ गए थे। तब उनका पैसे से कोई संबंध नहीं था। आप इस audio book में सुनेंगे की कैसे वे केवल चार दशकों के कम समय में ही देश के नंबर वन आन्ट्रप्रनुर की बुलंद ऊंचाई तक पहुंच गए थे।


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धीरुभाई अंबानी का प्रारम्भिक जीवन


धीरूभाई अंबानी, का पूरा नाम धीरजलाल हीराचंद अंबानी था। जिनका जन्म 28 दिसंबर, 1932 को चोरवाड़, गुजरात में हुआ और उनकी मृत्यु 6 जुलाई, 2002, मुंबई में हुई। वे एक इंडियन industrialist थे, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक थे। यह एक विशाल पेट्रोकेमिकल्स, कम्यूनिकेशन, पावर, और textile समूह जो भारत में सबसे बड़ा इक्स्पॉर्टर था और फॉर्च्यून 500 में पहली privately owned इंडियन कंपनी थी।


अंबानी अपने पिताजी जो गांव के एक स्कूली शिक्षक थे, उनके पांच बच्चों में से तीसरे थे। वे गाँव में केवल मामूली साधनों के परिवार में पले-बढ़े थे। महज 17 साल की उम्र में, वे अपने भाई के पास काम करने के लिए तब के ब्रिटिश कालोनी Aden चले गए। वहाँ पर उन्होंने ए बेस्स एंड कंपनी में एक क्लर्क के रूप में अपने करियर की शुरुआत कई, जो 1950 के दशक में स्वेज के पूर्व में सबसे बड़ी transcontinental trading firm थी। वहां पर उन्होंने ट्रैडिंग, accounting और अन्य बिजनस स्किल्स सीखे। वहाँ काफी समय काम करने के बाद अंबानी वर्ष 1958 में भारत लौट आए और बॉम्बे आज के मुंबई में बस गए।


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एक छोटी शुरुआत से Business Empire तक


Aden से आने के बाद धीरुभाई अंबानी ने मसालों की ट्रैडिंग का बिजनस शुरू कर दिया। अपने इस newly started बिजनस को उन्होंने रिलायंस कमर्शियल कॉर्पोरेशन नाम दिया। यह हाई क्वालिटी प्रोडक्टस के बदले में अपने competitors की तुलना में स्मॉल प्रॉफ़िट की स्ट्रैटिजी के साथ काम शुरू किया। थोड़े ही समय में उन्होंने अपने बिजनस में प्रोडक्टस बढ़ा दिए। उनका यह ट्रैडिंग बिजनस तेज गति से आगे बढ़ने लगा।


कमोडिटीज़ बिजनस के साथ साथ जितना संभव हो सके, धीरुभाई अंबानी ने अपना सारा ध्यान सिन्थेटिक textiles की ओर लगाया। उन्होंने वर्ष 1966 में अपनी पहली रिलायंस टेक्सटाइल मिल की ओपनिंग की। उन्होंने इस उद्घाटन के साथ ही बैक्वर्ड इनग्रैशन में अपना पहला प्रयास किया। बैक्वर्ड इनग्रैशन और डिवर्सफकैशन की पॉलिसी को बनाए रखते हुए, उन्होंने धीरे-धीरे रिलायंस को एक पेट्रोकेमिकल्स प्रोजेक्ट के रूप में आकार दिया और बाद में कंपनी के businesses में पहले प्लास्टिक और बाद में पावर जनरेशन को और जोड़ दिया।


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मुश्किलों में से सफलतापूर्वक बाहर निकालना


वर्ष 1977 में उन्हें अपने प्रोजेक्ट्स के लिए जब फंड्ज की बेहद आवश्यकता थी, तब nationalized banks ने उनके प्रोजेक्ट्स को फाइनैन्स करने से बिल्कुल मना कर दिया। जिसके परिणाम स्वरूप धीरुभाई अंबानी ने अपने पर्सनल स्वामित्व वाली रिलायंस कंपनी को पब्लिक कर दिया। उन पर इसके लिए यह आरोप लगे कि उन्होंने एक खराब ईकानमी को नेविगेट करके, गवर्नमेंट regulations और ब्युराक्रसी को पंगु बनाने में जो चालाकी दिखाई है उसमें उन्होंने पोलिटिकल manipulation, corruption और प्रतिस्पर्धियों पर छापे मरवाने तक के काम को उन्होंने ही अंजाम दिया था।


इन सबके चलते रिलायंस में उनके investors का confidence अडिग रहा। जिसमें सबसे बड़ा रोल कंपनी द्वारा पेश किए गए आकर्षक डिविडेंड़स और साथ ही साथ फाउन्डर का करिश्माई व्यक्तित्व और उनका दूरगामी विजन भी सहायक रहे।


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आम लोगों के सपनों को पंख देना


जैसा की आप इस audio book में जानेंगे कि धीरुभाई अंबानी को ही भारत के average investor के लिए शेयर मार्केट की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है। जिससे हजारों investors ने रिलायंस की वार्षिक आम बैठकों में भाग लिया, जो कभी-कभी एक स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित की जाती थीं, जिसे बहुत सारे लोग जो वहाँ नहीं पहुँच पाते थे वे लोग उसे टेलीविजन पर देखते थे।


और अंत में 1980 के दशक के मध्य में corporate Guru Dhirubhai Ambani ने अपनी कंपनी के day to day संचालन को अपने दोनों बेटों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी को सौंप दिया। लेकिन वर्ष 2002 में अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले तक वे अपनी कंपनी की देखरेख करते रहे।

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